तीसरा पत्र
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ये आल्या का दूसरा पत्र.
इस पत्र में आल्या प्रार्थना करती है कि मैं
उसे प्यार के बारे में न लिखूँ. थका हुआ पत्र है.
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मेरे प्यारे,
मेरे अपने. मुझे प्यार
के बारे में मत लिखो. कोई ज़रूरत नहीं है.
मैं बेहद थक गई हूँ. मेरी, जैसा कि तुमने ख़ुद
ही कहा है, गर्दन टूट गई है. हमारी लाइफ़-स्टाइल मुझे तुमसे अलग करती है. मैं तुमसे
प्यार नहीं करती और करूँगी भी नहीं. मुझे तुम्हारे प्यार से डर लगता है, कभी तुम इसी
बात पर मेरा अपमान भी कर सकते हो कि अभी मुझसे इतना प्यार करते हो. इतनी भयानक आहें
न भरो, तुम, फिर भी, मेरे अपने हो. मुझे डराओ मत! तुम मुझे इतनी अच्छी तरह से जानते
हो, मगर ख़ुद ही मुझे डराने की, मुझे अपने आप से दूर ढकेलने की हर तरक़ीब करते हो. हो
सकता है कि तुम्हारा प्यार महान हो, मगर वह ख़ुशनुमा नहीं है.
मुझे तुम्हारी ज़रूरत है, तुम मुझे अपने आप
से बाहर निकाल सकते हो.
मुझे, बस, अपने प्यार के बारे में मत लिखो.
टेलिफोन पर नाटक मत करो. तैश में न आओ. तुम मेरे दिन में ज़हर घोल दोगे. मुझे आज़ादी
चाहिए, जिससे कि मुझसे कोई भी, किसी भी बारे में न पूछ सके. मगर तुम मुझसे मेरा पूरा
वक़्त चाहते हो. आराम से लो, वर्ना प्यार में तुम टूट जाओगे. और, तुम दिन-पर-दिन और
ज़्यादा दुखी होते जाते हो. तुम्हें हेल्थ-रिसॉर्ट में जाना चाहिए, मेरे प्यारे.
बिस्तर में लेटकर लिख रही हूँ, क्योंकि कल
मैंने डान्स किया था. अब शॉवर लेने जा रही हूँ. हो सकता है, आज तुमसे मिलूँ.
आल्या
5 फरवरी.
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