गुरुवार, 21 मई 2015

Seventh Letter


पत्र सातवाँ
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पत्र के साथ भेजे गए फूलों के लिए धन्यवाद के साथ.
ये आल्या का तीसरा पत्र है. 
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तो, तुम्हें ख़त लिख रही हूँ, प्यारे तातार्चुक, फूलों के लिए धन्यवाद.

कमरा ख़ुशबू से भर गया है, बेतहाशा महक रहा है, मैं सोने नहीं गई, उनसे जुदा होने में इत्ता दुख हो रहा था.

स्तंभों वाले, हथियारों वाले, उल्लू वाले इस बेहूदा कमरे में मुझे ऐसा लगता है, जैसे अपने घर में हूँ.
यहाँ की गर्माहट, ख़ुशबू, और ख़ामोशी - मेरी है.

मैं उन्हें ले जाऊँगी, आईने के प्रतिबिम्ब की तरह; जब चली जाऊँगी – वे नहीं होंगे, वापस आऊँगी, देखूंगी – वे फिर वहीं नज़र आएँगे.  

 यक़ीन नहीं होता कि आईने में वे तुम्हारी वजह से ही रहते हैं.

मेरी सबसे बड़ी ख़्वाहिश ये है कि गर्मियाँ हों, कि वो सब, जो था, - न हो.

कि मैं जवान और तन्दुरुस्त होती.

तब तो मगरमच्छ और बच्चे की जुगलबन्दी में सिर्फ बच्चा बचा रहता, और मैं सुखी हो जाती.

मैं अभागी औरत नहीं हूँ, मैं – आल्या हूँ, गुलाबी और भरे-भरे बदन वाली.

बस, इतना ही.

’किस’ यू, गुड नाइट.

आल्या

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