पत्र अट्ठाईसवाँ
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इस शिकायत के साथ
कि दुख बहुत छोटा है. वह अपनी सामर्थ्य से ज़्यादा की मांग करता है.
दुख उसके रूमाल के
लिए काफ़ी है.
इसके अलावा पत्र
में मशहूर कहानी का एक अलग रूप दिया गया है.
ये पत्र लिखा नहीं
गया था, और अनकहे शब्द ख़याल बन जाते हैं.
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क़सम खाता हूँ ....
अपना उपन्यास मैं शीघ्र पूरा कर लूंगा.
औरत, जो मेरे ख़तों
का जवाब नहीं देती है!
तुमने मेरे प्यार
को टेलिफ़ोन के चोंगे में धकेल दिया है.
मेरा दुख मेरे पास
आता है और मेरे साथ एक ही मेज़ पर बैठ जाता है.
मैं उससे बातें
करता हूँ.
मगर डॉक्टर कहता
है कि मेरा ब्लड-प्रेशर सामान्य है और मेरा ये आभास – सिर्फ एक साहित्यिक घटना है.
दुख मेरे पास आता
है. मैं उससे बातें करता हूँ और मन ही मन पन्ने गिनता हूँ.
लगता है, सिर्फ
तीन पन्ने हैं.
कितना छोटा है
दुख.
कुछ और करना चाहिए
था - अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर.
इसका उलटा भी हो
सकता था.
मैं कर नहीं पाया.
मैं सिर्फ वही कर
पाया, जैसा तुमने हुक्म दिया था, छह कमीज़ें रखना.
तीन मेरे पास,
तीन लाँड्री में.
मुझे ख़ुद टूटना
चाहिए था, मगर मैंने अपने लिए तोड़ने वाला प्यार खोजा; बेशक, इस बारे में मैं
तुम्हें पहले भी लिख चुका हूँ.
आदमी पत्थर पे
चाकू घिस रहा है. उसे पत्थर की ज़रूरत नहीं है, हालाँकि वह उसकी तरफ़ झुकता है.
ये टॉल्स्टॉय से
है.
उसने ज़्यादा
विस्तार से और बेहतर लिखा है.
मेरी क़िस्मत में
सब कुछ पहले से ही निश्चित था.
मगर इसका उलटा भी
हो सकता था.
मैं तुम्हें
उपन्यास का दूसरा अंत बताता हूँ.
ये एण्डरसन से
होगा.
ये वो है, जो हो
सकता था.
एक था राजकुमार.
उसके पास दो क़ीमती
चीज़ें थीं: गुलाब का फूल, जो उसकी माँ की कब्र पर उगा था, और एक बुलबुल, जो इतना
मीठा गाती थी कि इन्सान अपनी रूह को भी भूल जाए.
उसे पड़ोस के राज्य
की राजकुमारी से प्यार हो गया और उसने उसे भेजा तोहफ़ा:
1) गुलाब,
2) बुलबुल.
2
गुलाब तो राजकुमारी ने स्केटिंग रिंग के इंस्ट्रक्टर को
भेंट कर दिया, और बुलबुल उसके यहाँ तीसरे ही दिन मर गई: उससे यूडीकोलन और पाउडर की
गंध बर्दाश्त नहीं हुई.
आगे एण्डरसन हर चीज़ गलत-सलत लिखता है.
राजकुमार ने गड़रिये का भेस नहीं बनाया.
उसने पैसे उधार लिए, रेशमी मोज़े और नुकीले सिरे वाले जूते
ख़रीदे.
एक दिन उसने मुस्कुराना सीखा, दो दिन – चुप रहना और तीन
महीने पाउडर की गंध की आदत डाली.
उसने राजकुमारी को तोहफ़ा दिया:
1)
एक झुनझुना, जिसके साथ शिम्मी डांस कर सकते हैं,
2) कोई एक खिलौना, जो हमेशा बेकार की बातें किया
करता था – शायद, समर्पण लेख वाली किताब थी.
राजकुमारी ने सचमुच में उसका चुम्बन
लिया.
वह रात जब राजकुमारी राजकुमार के पास
आई, वाक़ई में काली, बरसात वाली रात थी.
राजकुमारी ने आत्मविश्वास से दरवाज़ा
खटखटाया.
राजकुमार रेलिंग से फिसलता हुआ आया:
उसे हर रात ऐसा लगता था, कि कोई दरवाज़ा खटखटा रहा है, और वह बड़ी सफ़ाई से फ़िसलना
सीख गया था.
उसने दरवाज़ा खोला, और (क्यूबिज़्म की ख़ातिर कहूँगा) हवा ने
प्रिज़्म की भांति बारिश को चारों कोनों में बिखेर दिया और छतरी को गोलाकार आकृति
बनाते हुए फेंक दिया.
राजकुमार ने फ़ौरन छतरी को पहचान लिया.
वह अपने पैरों से भी नीचे झुका (वह तो देहलीज़ पर खड़ा था
ना) और बोला:
“आईये,
राजकुमारी, अपने घर में आईये”.
वह अन्दर आई; बारिश हो रही थी.
वह इतनी थक गई थी कि छतरी बन्द किए बिना ही सीढ़ियाँ चढ़ने
लगी.
राजकुमार ने उसे फ़ायर-प्लेस के सामने बिठाया, आग जलाई,
मेज़ सजाई और भागने की सोचने लगा. वह उसे तोहफ़ा देना चाहता था:
1) गुलाब,
2) बुलबुल.
राजकुमार परेशान हो गया.
बस, तभी फ़्राईड मछली हँसने लगी.
फ़्राईड मछली पूरब की कहानियों में हँसती है. इसके बारे
में विस्तार से अपनी दूसरी किताबों में बताऊँगा.
यूरोपियन साहित्य में, जहाँ तक मुझे ज्ञात है, वह पहली
बार मेरे यहाँ हँसी थी.
वह तब हँसती है, जब देखती है कि किसी ने झुनझुने के बदले
अपने दिल का तोहफ़ा दे दिया है.
इस बार वह बेतहाशा हँस रही थी, पूँछ को छपछपा रही थी और
सॉस उछाल रही थी.
“प्रिंस,” – उसने
कहा, - “तुम दूसरों की कहानियों को क्यों बिगाड़ते हो?”
“एण्डरसन ने मुझे
बदनाम कर दिया है,” प्रिंस ने जवाब दिया.
मेरा घर और मेरा दिल राजकुमारी का है!
र्क्योंकि वो, जिससे प्यार करते हैं, कभी भी क़ुसूरवार
नहीं होता.
और तू चुपचाप यहीं पड़ी रह और सॉस न उछाल, क्योंकि
राजकुमारी अभी तुझे खाने वाली है.”
“तू ख़ुद ही खाया
जा चुका है, ओ फ्राईड प्रिंस”, मछली ने कहा.
इतना कहकर वह
दुबारा मर गई, उकताहट के मारे: वह राजकुमारी से प्यार नहीं करती थी.
और, ये रहा
उपन्यास का दूसरा संभावित अंत.
राजकुमारी
राजकुमार के साथ एक ही घर में रहती है, क्योंकि शहर में ख़ाली फ्लैट्स बहुत ही कम
हैं.
राजकुमार खिलौने
सुधारने वाला बन गया: वह ग्रामोफ़ोन्स सुधारता है और झुनझुने बनाता है, जिनके साथ
शिम्मी डान्स किया जा सकता है.
राजकुमारी उसके घर
में रहती है.
मगर वह औरों के
साथ रहती है.
लगता है कि एक
बिन्दु से किसी सरल रेखा पर कई लम्ब डाले जा सकते हैं.
ये सब तब समझ में आ सकता है, जब, या तो तुम
नॉन-यूक्लिड जॉमेट्री को अच्छी तरह जानते हो, या उस हालत में, जब श्लेष इन्सान को
इतना कम हंसाता है, जैसे पेट का अल्सर.
यह सब है – “कैसे”.
मेरे सारे पत्र उस बारे में हैं कि मैं तुमसे
“कैसे” प्यार करता हूँ.
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