गुरुवार, 30 अप्रैल 2015

Second Introduction

दूसरी प्रस्तावना

पुरानी किताब के लिए

मेरा विगत – तुम थे.

बर्लिन की सड़कों के प्रातःकालीन फुटपाथ थे.

बाज़ार, खिले हुए सेबों की सफ़ेद पंखुडियों से ढंके.

सेबों की टहनियाँ बाज़ार की लम्बी मेज़ों पर बाल्टियों में खड़ी थीं.

बाद में, गर्मियों में, उनमें थे गुलाब, लम्बी टहनियों पर – शायद, ये बेलों वाले गुलाब थे.

उन्तेर-डेन-लिन्डेन पर फूलों की दुकान में ऑर्चिड्स थे, मगर मैंने उन्हें कभी नहीं ख़रीदा. ग़रीब था. गुलाब खरीदता था – ब्रेड के बदले.

दिल का जो टुकड़ा काटा गया था, उसे कब का ले गए. मुझे सिर्फ उस विगत का अफ़सोस है: विगत के इन्सान का.

मैंने उसे (विगत के स्वयँ को) इस किताब में छोड़ दिया है, जैसे कि पहले के उपन्यासों में किसी अपराधी नाविक को एक निर्जन टापू पर छोड़ दिया करते थे.

पड़ा रह तू गुनहगार: यहाँ गर्माहट है. मैं तुझे नहीं सुधार सकता. बैठा रह, सूर्यास्त की तरफ़ देखता रह.

वे पत्र जो पहली आवृति में नहीं थे, वाक़ई में तेरे द्वारा लिखे गए थे, मगर तूने उन्हें कभी भेजा ही नहीं.


1924. लेनिनग्राद

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