पांचवाँ पत्र
----------------------------------------------------------------------------------------------------------------------जिसमें अलेक्सेई मिखाइलोविच रेमिज़ोव का
वर्णन है और उसका बोतलों में पानी भर-भरकर चौथी मंज़िल पर ले जाने का तरीका बताया
गया है. यहीं महान बन्दरों के समाज की लाइफ़-स्टाइल और उसके तौर-तरीके बताए गए हैं.
यहाँ मैंने कला की विषय-वस्तु के रूप में व्यक्तिगत पहलू की भूमिका पर अपनी
सैद्धांतिक टिप्पणियाँ भी शामिल की हैं.
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तुम्हें मालूम है, कि बन्दरों के सम्राट
असिकी – अलेक्सेई रेमिज़ोव6 – के साथ फिर अप्रिय घटनाएँ हो रही हैं: उसे
फ्लैट से बाहर निकाल रहे हैं.
आदमी को अपनी मन मर्ज़ी के मुताबिक चैन से
जीने भी नहीं देते. सन् 1919 की सर्दियों में रेमिज़ोव पीटर्सबुर्ग में रहता था, और
उसके घर का नल अचानक टूट गया.
ऐसी हालत में कोई भी आदमी परेशान हो जाता.
मगर रेमिज़ोव ने अपने सभी परिचितों के पास से बोतलें इकट्ठा कीं, हर तरह की बोतलें:
छोटी- दवा वाली, वाइन वाली और जैसी भी मिलीं. उन्हें लाईन से कमरे में कालीन पर रख
दिया, फिर दो-दो बोतलें लेकर पानी के लिए सीढ़ियों से नीचे भागता. इस तरह से सप्ताह
के हर दिन के लिए पानी लाना होता है.
कितना असुविधाजनक है, मगर – है दिलचस्प!
रेमिज़ोव की ज़िन्दगी, - उसने ख़ुद ही अपनी
पूँछ से उसे बनाया, - बेहद असुविधाजनक, मगर दिलचस्प है.
उसका क़द छोटा है, बाल खूब घने और किसी
साही की तरह ऊपर को उठाए हैं. झुक कर चलता है, मगर होंठ लाल-लाल हैं. नाक छोटी और
चपटी, और हर चीज़ – जैसे जानबूझकर बनाई गई हो.
उसका पासपोर्ट बन्दरों जैसे चिह्नों से भर
गया है. पानी का नल टूटने से पहले ही, रेमिज़ोव लोगों से दूर हो गया था, - उसे पहले
ही से मालूम था कि वे कैसे पंछी हैं, - और वह महान बन्दर-लोक में चला गया.
बन्दर-समाज की नींव रेमिज़ोव ने रूसी-फ्री-मेसन
पद्धति के आधार पर डाली थी. उसमें ब्लॉक7 था, फ़िलहाल इस महान और
स्वतंत्र बन्दर-महल का संगीतज्ञ कुज़्मिन8 है, और ग्र्झेबिन9
– वो, गॉडफादर-बन्दर है, और अकाल और युद्धकालीन समय के दौरान इस समाज में उसका
रैंक और ओहदा है सामान्य-प्रिन्स का.
मुझे भी इस बन्दर-पैक्ट में शामिल किया
गया है, मैंने अपनी रैंक ख़ुद ही चुनी “छोटी पूँछ वाला छोटा बन्दर”. हेर्सोन में
रेड-आर्मी में जाने से पहले अपनी पूँछ मैंने ख़ुद ही काट दी. चूंकि तुम एक सामान्य-
विदेशन हो और तुम्हारे सूटकेस ये नहीं जानते कि उनकी मालकिन को लाल गालों वाली
साइबेरियन स्तेशा ने दूध पिलाया था, तो तुम्हें यह भी बताना पड़ेगा कि बन्दर-लोक
में सचमुच का सम्राट है. क़ाबिल सम्राट.
रेमिज़ोव की पत्नी है, बेहद रूसी, बेहद
हल्के-भूरे बालों वाली, मज़बूत - सेराफ़िमा पाव्लोव्ना रेमिज़ोवा-दोव्गेल्लो; बर्लिन
में वो ऐसे लगती है, जैसे सम्राट अलेक्सेइ मिखाइलोविच के समय के मॉस्को का कोई नीग्रो
हो, इत्ती सफ़ेद और रूसी है वो.
ख़ुद रेमिज़िव का नाम भी अलेक्सेइ
मिखाइलोविच है. उसने एक बार मुझसे कहा था:
“मैं अपना उपन्यास “इवान इवानोविच मेज़ पर बैठा
था” शुरू नहीं कर सकता.”
चूंकि मैं तुम्हारी इज़्ज़त करता हूँ, इसलिए
तुम्हारे सामने भेद खोल रहा हूँ.
जैसे गाय घास खाती है, उसी तरह साहित्यिक
विषय भी खाये जाते हैं, साहित्यिक विधाएँ जन्म लेती हैं और लुप्त हो जाती हैं.
लेखक हल जोतने वाला तो नहीं न हो सकता: वो
बंजारा है और अपने झुण्ड और बीबी के साथ नई घास पर चला जाता है. हमारी बन्दरों की
महान फ़ौज किप्लिंग की बिल्ली* की तरह छतों पर रहती है – “अपने
आप”.
आप ड्रेस पहनकर घूमती हैं, दिन पर दिन
बीतते जाते हैं; किसी की हत्या करने या किसी से प्यार करने में आप पारंपरिक हैं.
बन्दरों की फ़ौज उस जगह रात नहीं बिताती, जहाँ उसने दोपहर में भोजन किया हो, और
सुबह की चाय उस जगह नहीं पीती, जहाँ वह सोई हो. वो हमेशा बिना क्वार्टर की होती
है.
उसका काम है – नई चीज़ों का निर्माण करना.
इस समय रेमिज़ोव बिना कथानक की किताब का निर्माण करना चाहता है, बिना इन्सान के
भाग्य के, जो कथानक के मूल में होता है. कभी वह ऐसी किताब लिखता है, जो टुकड़ों से
बनाई गई है, - ये “पत्रों में रूस” है, ये कई किताबों के उद्धरणों से बनी है, या
फिर ऐसी किताब लिखता है, जो रोज़ानोव के पत्रों के आधार पर बढ़ती है.
पुराने तरीके से किताब नहीं लिखना चाहिए.
इसे ब्लॉक जानता है, रोज़ानोव अच्छी तरह जानता था, गोर्की जानता है, जब वह समन्वय
के बारे में नहीं सोच रहा होता है, और मैं, छोटी पूँछ वाला छोटा बन्दर, जानता
हूँ.
हमने अपनी रचनाओं में नाम और पिता के नाम
से परिचित, घनिष्ठता को सिर्फ इसी वजह से शामिल किया, कि कला में नई सामग्री की
आवश्यकता होती है. रेमिज़ोव की नई कहानी में सोलोमन काप्लून, अन्द्रेयेव के ब्लॉक
की मृत्यु पर विलाप में मारिया फ़्योदोरोव्ना – साहित्यिक रूप की आवश्यकता है.
बन्दरों की फ़ौज अपना काम साथ में ले जाती
है. घोड़े की चाल से, तिरछे-तिरछे, मैंने तुम्हारी ज़िंदगी को पार कर लिया है, ये
कैसे हुआ और अब कैसा है – तुम जानती हो; मगर आलिक, तुम मेरी किताब में इस तरह
प्रकट होगी, जैसे अब्राम के बनाए अलाव पर था इसाक. और, क्या तुम्हें मालूम है कि
अब्राम के नाम में ये एक अतिरिक्त ‘a’,
ईश्वर ने उसे बड़े प्यार से दिया है? (रूसी में इस नाम को Abram के बदले Abraam लिखा गया है – अनु.) ये अतिरिक्त स्वर
ईश्वर को भी अच्छा उपहार प्रतीत हुआ.
आलिक, क्या तुम्हें ये मालूम है?
वैसे, तुम शिकार नहीं बनोगी, तुम्हारे
बदले मैंने बलि का बकरा बन कर अपने सींग झाड़ियों में उलझा लिए हैं.
रेमिज़ोव का कमरा गुड़ियों से, ड्राईंग्स से
भरा है, और रेमिज़ोव बैठा-बैठा सबको श्-श् करता है
“धीरे, - मालकिन” और ऊँगली ऊपर उठाता है. वह मालकिन से डरता नहीं है – वो
खेलता है.
आज़ाद बन्दरों के लिए फुटपाथों पर चलना
मुश्किल है, पराई ज़िन्दगी है. इन्सानी औरतें समझ में नहीं आतीं. इन्सानी लाइफ़-स्टाइल
– भयानक, बेवकूफ़, ठस है, वह लचीली नहीं है.
हम लाइफ-स्टाइल को चुटकुलों में बदल देते
हैं.
दुनिया के और अपने बीच छोटी-छोटी,
अपनी-अपनी दुनियाएँ – ज़ू-पार्क्स बना लेते हैं.
हम आज़ादी चाहते हैं.
रेमिज़ोव कला की विधाओं से ज़िन्दगी जीता
है.
अब लिखना बन्द करता हूँ, मुझे बेकरी भागना
है केक के लिए. अभी मेरे पास कोई आने वाला है, फिर मुझे केक लाना है, फिर और किसी
के घर जाना है, फिर पैसे ढूँढ़ना है, किताब बेचनी है, युवा लेखकों से बातचीत करनी
है. कोई बात नहीं, बन्दरों की अर्थव्यवस्था में हर चीज़ ज़रूरी है. बाबेल की अव्यवस्था
(बेमतलब का शोरगुल – अनु.) हमें पर्लियामेंट के मुक़ाबले ज़्यादा समझ में आती
है, नोट करने के लिए हमारे अपने अपमान हैं, गुलाब और सैलाब हमारे यहाँ साथ-साथ चलते हैं, क्योंकि – तुकबन्दी है.
नहीं छोडूँगा मैं अपना लेखक का व्यवसाय, अपना
छतों वाला आज़ाद रास्ता किसी यूरोपियन सूट, चमचमाते जूतों, विदेशी मुद्रा के लिए,
आल्या के लिए भी नहीं.
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*रुडयार्ड किप्लिंग की कहानी से.
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