गुरुवार, 28 मई 2015

Ninth Letter


पत्र नौंवा
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बर्लिन की एक बाढ़ के बारे में; असल में पूरा पत्र रूपक के क्रियान्वयन को दर्शाता है: इसमें लेखक हल्के-फुल्के और प्रसन्न मूड में रहने की कोशिश करता है, मगर मुझे, शायद मालूम है कि इस पत्र में वह झूठ बोल रहा है.
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कैसी हवा चल रही है, आलिक! कैसी हवा है!

ऐसी हवा में पीटर्सबर्ग में पानी ऊपर चढ़ने लगता है, आलिक.

ऐसे में पेत्रोपाव्लोव्स्की बुर्ज़ में हर पन्द्रह मिनट बाद घण्टे बजाये जाते हैं, मगर उन्हें कोई सुनता ही नहीं है.

लोग तोप के गोलों को सुनते हैं.

तोप के गोले दागे जाते हैं. एक. एक, दो. एक, दो, तीन...

ग्यारह बार.

बाढ़.

गर्म हवा, पीटर्स की ओर लपकते हुए, उसकी ओर पानी नेवा से ले जाती है.

मैं ख़ुश हूँ. और, पानी बढ़ता ही जा रहा है. और, सड़क पर हवा, आलिक, मेरी हवा, हमारी बसन्ती, पीटर्स की हवा!

पानी उफ़न रहा है.

उसने पूरे बर्लिन को डुबो दिया, और अण्डरग्राउण्ड रेल टनल में तैरने लगी, मरी हुई मछली के समान, पेट ऊपर किए.

वह एक्वेरियम से सारी मछलियों और मगरमच्छों को बहा ले गई.

मगरमच्छ तैर रहे हैं, बिना जागे, सिर्फ जबड़े भींचते हैं, कि ठण्ड है, और पानी सीढ़ियों पर चढ़ रहा है.

ग्यारह फुट. वह तुम्हारे कमरे में आ गया. आल्या के कमरे में पानी चुपके से घुस रहा है: सीढ़ियों पर पानी को कहीं और उछलने के लिए जगह ही नहीं है. मगर कमरे के भीतर पानी का स्वागत करती हैं आलिना की जूतियाँ.

आगे नाटक है.

जूतियाँ: तुम क्यों आये हो? आलिक सो रही है! (वे भी तुमसे प्यार करती हैं.)
पानी (धीमी आवाज़ में): ग्यारह फुट, जूतियों महोदया! पूरा बर्लिन पेट ऊपर किए तैर रहा है, लहरों पर सिर्फ हज़ार-हज़ार मार्क्स के नोट्स ही नज़र आ रहे हैं. हम – रूपक को कार्यान्वित कर रहे हैं. आल्या से कहना कि वह फिर से टापू पर है, अपयाज़ (OPOYAZ) 11 ने उसके घर की घेराबन्दी कर दी है * .
जूतियाँ: मज़ाक मत करो! आल्या सो रही है. बेवकूफ़ ऊँचे पानी! आल्या थक गई है. आल्या को फूल नहीं, फूलों की ख़ुशबू चाहिए. प्यार में से आल्या को सिर्फ प्यार की ख़ुशबू और नज़ाकत चाहिए. उसके कंधों पर इसके अलावा कोई और बोझ नहीं डाला जा सकता.
पानी: ओह, मेरी प्यारी मैडमों, आल्या की जूतियों! ग्यारह फुट. पानी बढ़ता ही जा रहा है. तोप के गोले दागे जा रहे हैं. गरम हवा यहाँ घुसी चली आ रही है, और हमें समुन्दर की ओर नहीं जाने दे रही है. वास्तविक प्यार की गरम हवा. ग्यारह फुट. हवा इतनी तेज़ है कि पेड़ ज़मीनदोस्त हो गए हैं.
जूतियाँ: ओ, पराई पनचक्की वाले पानी. प्यार में ताक़त के अधिकार का इस्तेमाल करना अच्छी बात नहीं है!
पानी: ताक़तवर प्यार का अधिकार?
जूतियाँ: ताक़तवर प्यार का भी नहीं. हाँ. उसे ताक़त से मत सताओ. उसे ज़िन्दगी की भी ज़रूरत नहीं है. वो, मेरी आलिक, डान्स करना इसलिए पसन्द करती है, क्योंकि वह प्यार की परछाई होता है. प्यार आल्या से करो, अपने प्यार से नहीं.

और पानी वापस जाने लगता है, अपने साथ संशोधित पाण्डुलिपियों वाली सूटकेस लिए हुए. जब पानी चला जाता है, तो जूतियाँ एक दूसरे से कहती हैं:

 “ओह, परेशान कर दिया इन साहित्यकारों ने!”

जूतियाँ बुरी नहीं हैं, मगर वे दो हैं, और दो औरतें, अगर एक दूसरे की बगल में इतनी देर तक खड़ी रहेंगी, तो वे बकवाद किए बिना नहीं रहेंगी.

इस ख़त को मैंने लिखा और फिर से लिखा. अब तुम्हारे सम्मान में मैं इसकी नकल करूँगा.

इस तरह से ख़ुदा ने  “महाप्रलय” के सम्मान में इन्द्रधनुष दर्ज कर लिया.
     
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* रूसी में यह वाक्य है: opoyasan (घिर गया है) opoyazom(अपयाज़ से)

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