बुधवार, 22 अप्रैल 2015

Introduction to First Edition

तीन प्रस्तावनाएँ
लेखकीय प्रस्तावना
पहली आवृति के लिए


यह पुस्तक इस तरह से लिखी गई.

सबसे पहले तो मैंने सोचा कि रूसी-बर्लिन के बारे में कई किस्से प्रस्तुत करूँ, फिर ऐसा प्रतीत हुआ कि इन किस्सों को किसी सामान्य विषय में पिरोना काफ़ी दिलचस्प होगा. विषय चुना “चिड़ियाघर” (“Zoo”) – पुस्तक का शीर्षक पैदा हो गया, मगर वह विभिन्न टुकड़ों को जोड़ नहीं रहा था. फिर ये ख़याल आया कि इसे पत्रों की शक्ल के एक उपन्यास का रूप क्यों न दिया जाए.

पत्रों वाले उपन्यास के लिए किसी कारण की आवश्यकता होती है – आख़िर लोग एक दूसरे को पत्र क्यों लिखते हैं. आम तौर से एक कारण होता है – प्रेम और विरह. मैंने अंशतः इस कारण को चुना: एक प्रेमी ऐसी महिला को पत्र लिखता है, जिसके पास उसके लिए समय नहीं है. अब मुझे एक नए संदर्भ की ज़रूरत पड़ी: चूंकि पुस्तक की प्रमुख विषयवस्तु प्रेम नहीं है, अतः मैंने प्रेम के बारे में लिखने की बंदिश को चुना. परिणाम वह हुआ जिसे मैंने उपशीर्षक में दर्शाया है – “(अ)प्रेम-पत्र”.

अब तो जैसे किताब ख़ुद-ब-ख़ुद लिखती चली गई, उसे बस, ज़रूरत थी विषयवस्तु को जोड़ने की, अर्थात् प्रेम-काव्य पक्ष और वर्णनात्मक पक्ष को गूंथने की. भाग्य और विषयवस्तु के सामने सिर झुकाते हुए, मैंने इन चीज़ों को तुलनात्मक रूप से एक दूसरे से जोड़ा: तब सारे वर्णन प्रेम के रूपक प्रतीत होने लगे.

श्रृंगार-काव्य की चीज़ें इस तरह से लिखी जाती हैं: उनमें वास्तविक चीज़ों को नकारते हुए रूपकों पर बल दिया जाता है.

“प्राचीन कथाओं” से तुलना करें.


बर्लिन, 5 मार्च 1923

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