शनिवार, 13 जून 2015

Eleventh Letter

पत्र ग्यारहवाँ
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यह पत्र, ज़ाहिर है, उस टिप्पणी के उत्तर में लिखा गया है, - जो शायद फ़ोन पर की गई थी, क्योंकि उसका कोई लिखित प्रमाण नहीं बचा है, - ये खाने के तरीक़े के बारे में है और प्लीट वाली पतलून पहनने की ज़रूरत को नकारता है.
पूरे पत्र में बाइबल से ली गईं तुलनाओं की भरमार हैं.   ______________________________________________________________________


मैं क़सम खाकर कहता हूँ – कि पतलून की प्लीटें नहीं होनी चाहिए.

पतलून इसलिए पहनी जाती है, ताकि सर्दी न लगे.

सेरापियोनों15 से पूछ लो.

खाने के ऊपर झुकना, हो सकता है, कि वाक़ई में अच्छा न हो.

हमारे बारे में तुम कहती हो कि हमें खाना नहीं आता.

हम प्लेट के ऊपर ज़रा ज़्यादा ही झुक जाते हैं, और खाने को अपनी तरफ़ नहीं लाते.
ठीक है, एक दूसरे की आदतों पर अचरज करते रहेंगे.

इस देश में मुझे कई बातें आश्चर्यजनक लगती हैं, जहाँ पतलून पर सामने की ओर प्लीट होनी चाहिए; वे, जो ज़्यादा ग़रीब हैं, रात में अपनी पतलून बिस्तर के नीचे रखते हैं.

रूसी साहित्य में यह विधा परिचित है, उसका उपयोग किया जाता है – कूप्रिन की रचनाओं में – उच्च वर्ग के पेशेवर भिखारियों द्वारा.

यहाँ की लाइफ़-स्टाइल मुझे गुस्सा दिलाती है!

लेविन इतना गुस्सा हुआ (“आन्ना कारेनिना”), जब उसने देखा कि घर में सेमियाँ उसके (लेविन के) तरीक़े से नहीं, बल्कि कीटी के परिवार के तरीक़े से पकाई जा रही हैं.

जब न्यायाधीश गिदिओन फ़िलिस्तीनियों पर हमला करने के लिए गुरिल्ला दस्ते इकट्ठे कर रहा था, तो उसने सबसे पहले सारे पारिवारिक लोगों को घर भेज दिया.

फिर देवदूत ने सभी बचे हुए योद्धाओं को नदी के किनारे लाने की आज्ञा दी और युद्ध में सिर्फ उन्हीं को लेने की आज्ञा दी जो चुल्लुओं से पानी पीते थे, और नदी पर झुकते नहीं थे और कुत्ते की तरह उसे नहीं चाटते थे.

क्या वाक़ई में हम बुरे योद्धा हैं?

फिर भी, ऐसा लगता है कि, जब यहाँ सब कुछ बिखर जाएगा, जल्दी ही बिखर जाएगा, तो ये हम ही होंगे, जो दो-दो की क़तार में कंधों पर संगीनें उठाए, पतलूनों की (बिना प्लीट्स वाली) जेबों में कारतूस भरे, घुड़सवार दस्ते की फ़ेन्सिंग के पीछे से फ़ायर करते हुए, वापस रूस चले जाएँगे.

मगर प्लेटों के ऊपर न झुकना ही बेहतर है.

न्यायाधीश गिदिओन की अदालत का फ़ैसला बड़ा ख़तरनाक है! अगर वो हमें अपनी फ़ौज में शामिल न करे तो?

बड़े दिलचस्प तरीक़े से बाइबल दुहराई जा रही है.

एक बार यहूदियों ने फ़िलिस्तीनियों को हरा दिया. अपने आप को बचाने के लिए वे नदी से होकर भागते रहे, दो-दो की क़तार में भागते रहे.

यहूदियों ने छिछले पानी के पास पहरा बिठा दिया.

उस समय यहूदियों और फ़िलिस्तीनियों में फ़र्क करना मुश्किल था: ये भी और वो भी, निश्चित रूप से, नंगे थे.

पहरेदार भागने वालों से पूछता: “ ‘शाबेलेस’ कहो.”

मगर फ़िलिस्तीनियों को ‘श’ कहना नहीं आता था, वे कहते ‘साबेलेस’.

तब उन्हें मार दिया जाता.

मैंने युक्रेन में एक यहूदी बच्चे को देखा था. वह बिना थरथर कांपे कुकुरूज़ा (भुट्टे) की ओर नहीं देख सकता था.

उसने मुझे बताया:
जब युक्रेन में लोगों को मार रहे थे, तो उन्हें इस बात की जाँच करनी पड़ती थी कि जिसे मार रहे हैं, वह यहूदी है या नहीं.
उससे कहते: “कहो ‘कुकुरूज़ा’”
यहूदी कभी कभी कहता : ‘कुकुरूझा’.

उसे मार डालते.

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