शनिवार, 8 अगस्त 2015

Twenty Seventh Letter

पत्र सत्ताईसवाँ

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सापेक्षता के सिद्धांत के बारे में, और कानों में बालियों वाले जर्मन के बारे में.
यहीं उस चुहिया की कहानी भी है, जो लड़की बन गई थी.  
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क्या कानों में बालियाँ पहनने वाला आदमी आकर्षक हो सकता है?

बेशक, सिर्फ नक़ाब पहनकर किए गए नृत्यों में.

पतलूनें छैलों जैसी, मगर अपने आप की इज़्ज़त करने वाले इन्सान के लिए काफ़ी चौड़ी. और सड़क पर – ऊदबिलाव की हैट.

और तुम उसकी ओर बस खिंची चली जाती हो!

क्या करूँ, आल्या, तुमसे साक्षेपता के सिद्धांत के बारे में सीखूँगा.

ख़ैर, देखो, इस कहानी को.

एक सन्यासी ने एक चुहिया को, जिसे वह प्यार करने लगा था – अजीब सा प्यार, मगर बर्लिन में अकेलेपन के कारण और कर भी क्या सकते हो – लड़की में परिवर्तित कर दिया.

लड़की सन्यासी से प्यार नहीं करती थी. सन्यासी उससे ईर्ष्या करता था.

वह उससे कहती: “तो, ऐसा है तुम्हारा प्यार.”

लड़की ने ये भी कहा: “सबसे पहले, मुझे आज़ादी चाहिए. बेहतर है तुम चले जाओ.”

सन्यासी ने उसे फ़ोन किया और कहा: “आज अच्छा दिन है!”

लड़की ने कहा: “मैंने अभी कपड़े नहीं बदले हैं.”

सन्यासी ने कहा : “मैं इंतज़ार करूँगा. जाएँगे, मैं दुकानों में तुम्हारे साथ रहूँगा.”

लड़की शॉपिंग करती रही.

फिर सन्यासी उसे शहर से बाहर, वन्नसे ले गया.

सूरज अभी डूबा नहीं था.

हालाँकि दुकानें ख़ूब सारी हैं.

उसने कहा: “क्या सूरज से शादी करोगी?”

उसी समय एक बादल ने सूरज को ढाँक दिया.

लड़की ने कहा: “बादल ज़्यादा ताक़तवर है.”

सन्यासी समझदारी दिखा रहा था, ख़ासतौर से लड़की के प्रति.

उसने कहा: “क्या तुम चाहती हो कि बादल तुम्हारा पति बने?”

तभी हवा ने बादल को भगा दिया.

लड़की ने कहा: “हवा ज़्यादा ताक़तवर है.”

सन्यासी को गुस्सा आने लगा.

टेलिफ़ोन ने उसका दिमाग़ ख़राब कर दिया.

वह चीख़ा: “मैं हवा से तुम्हारी शादी की बात करता हूँ!”

लड़की ने अपमानित होकर कहा: “मुझे हवा की ज़रूरत नहीं है, मुझे गर्मी हो रही है और हवा चल ही नहीं रही है. मुझे इस पहाड़ ने ढाँककर हवा से अलग कर दिया है. पहाड़ ज़्यादा ताक़तवर है.”

सन्यासी समझ गया कि औरतें दुकानों में काफ़ी देर तक चीज़ें पसन्द करती हैं और लड़की सोच रही है कि वह दुकान में है. उसने फ़ौरन, किसी सेल्समैन की तरह जवाब दिया: “तो पहाड़ ले लो!”

लड़की का मुख खिल गया. वह बेहद ख़ुश हो गई.

सन्यासी को लगा कि वह भी सुखी है.

उसने ऊँगली से पहाड़ के निचले हिस्से की ओर इशारा किया और कहा: “देखो!”

सन्यासी को कुछ भी दिखाई नहीं दिया.

 “देखो, वह कितना सुन्दर है, कितना ताक़तवर है, वह पहाड़ से ज़्यादा ताक़तवर है, यही है मेरा जीवनसाथी, कैसे कपड़े पहने हैं उसने!”

 “किसने?” – सन्यासी ने पूछा.

 “चूहा, प्यारे सन्यासी!” लड़की ने कहा. “उसने पहाड़ को कुतर दिया, देखो, वह मुझसे प्यार भी करने लगा है.”

 “ग्रेट,” सन्यासी ने कहा, “इससे तुम सचमुच में प्यार करोगी; ख़ैर, ये तो अच्छा हुआ कि तुमने कम से कम म्यूज़िकल-कॉमेडी के किसी आदमी से प्यार नहीं किया.”

और उसने लड़की-चुहिया के गुलाबी कानों को चूम लिया और उसे चूहों का पासपोर्ट देकर छोड़ दिया. इस पासपोर्ट से, वैसे, सभी देशों में प्रवेश मिल जाता है.

चूहे पर गुस्सा मत करो.

तांबे के बटनों से दिल छलनी हो गया है, लिफ़्ट वाले लड़के के जैकेट की तरह.

दिन भर में वह हज़ारों बार ऊपर उठता है और हज़ारों बार नीचे गिरता है.

वह चूहेदानी की लकीरें पड़ी चुहिया जैसा है.

मैं तुमसे प्यार करता हूँ – जैसे सूरज करता है. जैसे हवा करती है. जैसे पहाड़ करता है.



जैसे प्यार करते हैं : हमेशा के लिए.

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